मानो प्रकृति का गौना लिवाने स्वयं आते हैं भोलेनाथ

डा.विधि नागर, कथक नृत्यविदुषी षड्ऋतुओं में सभी का अपना-अपना अस्तित्व है। परंतु फाग की अल्हड़ मस्ती और सावन की झीनी फुहार का तो अपना ही मजा होता है। जब ग्रीष्म के ताप से झुलसे तन पर सावन की रिमझिम फुहारें पड़ती हैं तो तन के साथ-साथ मन भी भींग कर मयूर की तरह नाच उठताContinue reading “मानो प्रकृति का गौना लिवाने स्वयं आते हैं भोलेनाथ”